HEPATITS – CAUSES/ PREVENTION/ TREATMENT

यकृत या जिगर या कलेजा (Liver) शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है, जो पित्त (Bile) का निर्माण करती है। पित्त, यकृती वाहिनी उपतंत्र (Hepatic duct system) तथा पित्तवाहिनी (Bile duct) द्वारा ग्रहणी (Duodenum), तथा पित्ताशय (Gall bladder) में चला जाता है। पाचन क्षेत्र में अवशोषित आंत्ररस के उपापचय (metabolism) का यह मुख्य स्थान है।


आजकल खानपान की अनियमितता , दूषित और मादक द्रव्यों का सेवन बढ़ता जा रहा है. इसके परिणामस्वरूप कुछ बीमारियां पैदा हो रही हैं. इनमे से एक बीमारी है यकृत शोथ यानी यकृत पे सूजन होना जिसे ऐलोपैथिक भाषा में हेपेटाइटिस (hepatitis ) कहा जाता है. इस रोग के बारे में बहुत उपयोगी और विस्तृत जानकारी यहाँ प्रस्तुत की जा रही है.

यकृत महत्वपूर्ण ग्रंथि (Liver an important organ )

यकृत हमारे शरीर का सबसे बड़ा एवं अत्यंत सक्रीय अवयव है.

 

हेपेटाइटिस यकृत की एक सामान्य रूप से होने वाली बीमारी है. इसमें यकृत कोशों में प्रदाह की अवस्था उतपन्न हो जाती है. यकृत कोशिकाएं लगातार क्षतिग्रस्त होती रहती हैं. फलस्वरूप यकृत द्वारा सम्पादित विभिन्न रासायनिक कार्य धीमे हो जाते हैं, या विकृत हो जाते हैं. यकृत कमज़ोर हो जाता है. यह अवस्था लंबे समय तक रहने से यकृत में कड़ापन आता है, ऑटो-इम्यून व्यवस्था में व्यवधान पद जाता है जिससे सम्पूर्ण स्वास्थ्य चरमरा जाता है. हेपेटाइटिस की बीमारी तीव्र अवस्था में कुछ काल रहकर ठीक हो जाती है या कष्टसाध्य व् असाध्य अवस्थाओं को प्राप्त होकर घातक सिद्ध होती है.

 

हेपेटाइटिस के प्राकृतिक, आयुर्वेदिक उपचार (Natural and Ayurveda treatments of HEPATITIS )

कुछ प्राकृतिक उपचार यकृत को स्वाभाविक अवस्था प्रदान करने में सहायक होते हैं. जैसे – जीर्ण कब्ज होने पर गुनगुने गर्म पानी के एनिमा का प्रयोग करें. रेचक औषधि का प्रयोग न करें. इनके प्रयोग से समस्त पाचन प्रणाली, आंतें, लिवर, आदि उत्तेजित होकर थक जाते हैं. कमजोर हो जाते हैं.
– पेडू पर ठन्डे पानी की पट्टियां दिन में २/३ बार रखें या पेडू पर स्वच्छ , शीतल मिटटी की पट्टी का प्रयोग करें.
– सुबह-शाम आधा घंटा ठन्डे जल से कटिस्नान करने से यकृत प्रदाह में लाभ होता है.
– शीतल प्रयोगों से अनावश्यक उष्णता दूर हो जाती है . पाचन तंत्र में सुधार हो जाता है. यकृत की सूजन घट जाती है व् यकृत स्वस्थ व् मज़बूत बनता है.

विशिष्ट उपचार – हेपेटाइटिस A पीलिया होने पर एक से दो सप्ताह तक मात्र फल, फल का रस या सलाद, उबली सब्जियों का या एक सब्जी का सूप लेकर रहने से यकृत स्वाभाविक हो जाता है. बाद में धीरे धीरे शुद्ध आहार पर आ जाना चाहिए.यकृत प्रदाह की अवस्था में भूख मंद या बंद हो जाती है.ऐसे समय आहार ग्रहण करने से यकृत का कार्यभार बढ़ता है. यकृत शोथ में जीर्णावस्था में रसाहार या जलोपवास करने से भी लाभ होता है. रोगी की शारीरिक अवस्था, रोग लक्षणों की उग्रता देख कर युक्ति पूर्वक इन्हे प्रायोजित करने से आशातीत लाभ होता है.

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