kidney failure and Treatment- किडनी खराब होने के संकेत एवं अचूक इलाज

किडनी खराब होने के संकेत

 

1. किडनी के होने से शरीर से गंद तथा पेशाब बाहर निकलते हैं। जब ऐसा नहीं हो पाता तो किडनी में भरे हुए गंद के कारण आपके हाथ, पैर, टखना एवं चेहरा सूज जाता है।

2. इस अवस्था में मूत्र का रंग गाढ़ा हो जाता है या फिर मूत्र की मात्रा या तो बढ़ जाती है या कम हो जाती है। इसके अलावा बार-बार मूत्र होने का एहसास होता है मगर करने पर नहीं होता है। इसके अन्य लक्षणों में मूत्र त्याग करने के वक्त दर्द, दबाव और जलन जैसा अनुभव होता हो।

3. जब मूत्र में रक्त आने लगे या फिर झाग जैसा मूत्र आए तो बिना सोचे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए 

क्योंकि यह किडनी के खराब होने का निश्चित ही संकेत होता है।

 

Here a wonderful formula for kidney failure patients. It helps to lower down increased urea and creatinine levels. It has following 8 ingredients:

  • Punarnava (Boerhaavia diffusa):

    पुनर्नव का शाब्दिक अर्थ है "जो फिर से बढ़ता है" इसे आमतौर पर 'होग्वेड' के रूप में जाना जाता है और एक 
    हर्बल मूत्रवर्धक के रूप मेंउपयोगी होता है। यह गुर्दे की विफलता के कारण संचित शरीर से अतिरिक्त पानी को हटाने 
    में मदद करता है। यह प्रकृति में ठंडा है, यह एडीमा और सूजन को कम करता है, दिल को उत्तेजित करता है और
     रक्त परिसंचरण, गुर्दे और मूत्र प्रणाली को प्रभावित करता है। इसलिए यह हृदय विकार, बूंद, जौनिस, डिसुरिया 
    (दर्दनाक मिक्चरिशन) और गुर्दे की बीमारियों के लिए उपयोगी है।
  • Varun (Crataeva nurvala):

    गुर्दे की विफलता का प्रबंधन करने के लिए यह एक और उत्कृष्ट जड़ी बूटी है। यह 'कापर' नाम से लोकप्रिय है और 
    मूत्र पथ संक्रमण से छुटकारा पाने के लिए आयुर्वेद में इसका उपयोग किया गया है और गुर्दे के पत्थरों को तोड़ने में 
    मदद करता है। यह गुर्दे की विफलता के कारण अतिरिक्त द्रव संचय और सूजन से राहत में भी प्रभावी है।
  • Gokshur (Tribulus terrestris):

    यह एक मूत्रवर्धक के रूप में उपयोगी है और जीनिटो-मूत्र प्रणाली के लिए एक हर्बल टॉनिक के रूप में कार्य करता 
    है। यह मूत्र पथ में बाधाओं को दूर करने में मदद करता है और गुर्दे की कोशिकाओं को ताकत और पुनर्जन्म प्रदान 
    करता है। इसका काढ़ा डिसुरिया (दर्दनाक मिक्चरिशन) में मदद करता है, यह डायलिसिस से बचने में भी मदद 
    करता है। यह वता और पिट्टा को कम करता है और एडीमा और सूजन से राहत देता है। यह उत्सर्जन प्रणाली को 
    साफ करता है।
  • Kaasni (Cichorium intybus):

    यह एक आम पौधा है जिसे 'चिकरी' नाम से जाना जाता है। यह गुर्दे को ताकत देता है। कासनी आयुर्वेद में उपयोग 
    की जाने वाली एक उपयोगी जड़ी बूटी है क्योंकि यह पुरानी और तीव्र गुर्दे की विफलता में फायदेमंद है। इसका 
    उपयोग नेफ्राइटिस, नेफ्रोटिक सिंड्रोम और अन्य स्थितियों के प्रबंधन में किया जाता है जो गुर्दे की विफलता का कारण
    बनता है।
  • Bhumi amla (Phyllanthus niruri):

    यह पित्त को शांत करता है और रक्त विकार, सूजन और edema के लिए उपयोगी है। यह दर्दनाक aur बारंबार पेशाब
    करने की इच्छा के लिए उपयोगी है और जलने की उत्तेजना से राहत देता है।
  • Shirish (Albezzia lebbeck):

    यह त्रिदोष को शांत करता है। यह जहरों के लिए सबसे अच्छा प्रतिरक्षी है। यह दर्दनाक मिक्चरिशन, शरीर की सूजन 
    के लिए उपयोगी है।
  • Shigru (Moringa oleifera):

    यह एंटीऑक्सीडेंट में समृद्ध है और शरीर के ऊतकों को पोषण देता है।
  • Apamarg (Achyanthes aspera): 

 Apamarg मूत्र पथ पत्थर तोड़ने में मदद करता है। यह RENAL STONES के लिए सबसे प्रभावी है,एकप्रभावी रक्त शोधक 
और VATA शांत करता है।

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